Lakshmi Panchami 2020: How To Do Laxmi Panchami Puja Know Vidhi, Katha And All You Need To Know - Lakshmi Panchami: लक्ष्मी पंचमी कब मनाई जायेगी? इस दिन मां लक्ष्मी भक्तों को देती हैं सुख समृद्धि का आशीर्वाद - Jansatta

Lakshmi Panchami: लक्ष्मी पंचमी कब मनाई जायेगी? इस दिन मां लक्ष्मी भक्तों को देती हैं सुख समृद्धि का आशीर्वाद

Lakshmi Panchami 2020, लक्ष्मी पंचमी: शास्त्रों में देवी लक्ष्मी के स्वरूप को अत्यंत सुंदर और प्रभावी दर्शाया गया है। देवी लक्ष्मी की पूजा से दरिद्रता दूर होने की मान्यता है।

इस दिन मनोवांछित फल की प्राप्ति के लिए मां लक्ष्मी की विधि विधान पूजा की जाती है।

Lakshmi Panchami Vrat 2020: लक्ष्मी पंचमी व्रत हर साल चैत्र शुक्ल पक्ष की पंचमी को किया जाता है। इस बार ये व्रत 29 मार्च को पड़ रहा है। इस दिन मनोवांछित फल की प्राप्ति के लिए मां लक्ष्मी की विधि विधान पूजा की जाती है। इसे श्री पंचमी के नाम से भी जाना जाता है। ऐसा माना जाता है इस दिन मां लक्ष्मी की अराधना करने से घर परिवार में सुख समृद्धि बनी रहती है। शास्त्रों में देवी लक्ष्मी के स्वरूप को अत्यंत सुंदर और प्रभावी दर्शाया गया है। देवी लक्ष्मी की पूजा से दरिद्रता दूर होने की मान्यता है। जानिए लक्ष्मी पंचमी व्रत की महिमा और पूजा विधि…

लक्ष्मी पंचमी व्रत कथा: पौराणिक ग्रंथों में जो कथा मिलती है उसके अनुसार मां लक्ष्मी एक बार देवताओं से रूठ गई और क्षीर सागर में जा मिली। मां लक्ष्मी के चले जाने से देवता मां लक्ष्मी यानि श्री विहीन हो गये। तब देवराज इंद्र ने मां लक्ष्मी को पुन: प्रसन्न करने के लिये कठोर तपस्या कि व विशेष विधि विधान से उपवास रखा। उनका अनुसरण करते हुए अन्य देवताओं ने भी मां लक्ष्मी का उपवास रखा, देवताओं की तरह असुरों ने भी मां लक्ष्मी की उपासना की। अपने भक्तों की पुकार मां ने सुनी और वे व्रत समाप्ति के पश्चात पुन: उत्पन्न हुई जिसके पश्चात भगवान श्री विष्णु से उनका विवाह हुआ और देवता फिर से श्री की कृपा पाकर धन्य हुए। मान्यता है कि यह तिथि चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि थी। यही कारण था कि इस तिथि को लक्ष्मी पंचमी के व्रत के रूप में मनाया जाने लगा।

श्री लक्ष्मी पूजा विधि: लक्ष्मी पंचमी व्रत रखने वालों को इस दिन प्रात:काल में स्नान आदि कार्यो से निवृत होकर, व्रत का संकल्प लेना चाहिए। इस दिन माता लक्ष्मी की पूजा भगवान विष्णु के साथ की जाती है। इस दिन श्री लक्ष्मी को पंचामृत से स्नान कराया जाता है। पूजा सामग्री में अनाज, हल्दी, गुड़, अदरक आदि का उपयोग जरूर करें। सामर्थ्यनुसार कमल के फूल, घी, बेल के टुकड़े इत्यादि चीजों से हवन करवाना चाहिए। इसके बाद व्रत रखने वाले लोग ब्रह्माणों को भोजन कराते हैं और दान- दक्षिणा देते हैं। इस व्रत में अन्न ग्रहण नहीं करना चाहिए। केवल फल, दूध, मिठाई का सेवन किया जा सकता है।

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