Himachal researcher’s 63 days of dodging coronavirus, Wuhan to Kangra - 36 दिन वुहान, 16 दिन दिल्ली फिर 11 दिन घर में रहा क्वारंटाइन, जानें- गांव से चीन तक 36 साल के वैक्सीन रिसर्चर की दास्तां - Jansatta

36 दिन वुहान, 16 दिन दिल्ली फिर 11 दिन घर में रहा क्वारंटाइन, जानें- गांव से चीन तक 36 साल के वैक्सीन रिसर्चर की दास्तां

सोम दत्त नाम का यह वैक्सीन रिसर्चर वुहान में एक अपार्टमेंट में छत्तीस दिनों बंद रहा उसके बाद वह 16 दिनों तक दिल्ली में क्वारंटाइन में रहा और आखिरी में वह अपने घर कांगड़ा पहुंचकर 11 दिनों तक होम क्वारेंटाइन में रहा।

Author Edited By सिद्धार्थ राय नई दिल्ली | Updated: March 26, 2020 1:33 PM
सोम दत्त इस समय अपने गाँव मतलहर में अपने परिवार के साथ हैं। (indian express photo)

गगनदीप सिंह  

कोरोना वायरस के संक्रमण से 63 दिनों तक किसी तरह खुद को बचते-बचाते हुए चीन में काम करने वाला 36 वर्षीय एक वैक्सीन रिसर्चर वुहान से अपने घर हिमाचल प्रदेश पहुंच गया है। सोम दत्त नाम का यह वैक्सीन रिसर्चर वुहान में एक अपार्टमेंट में छत्तीस दिनों बंद रहा उसके बाद वह 16 दिनों तक दिल्ली में क्वारंटाइन में रहा और आखिरी में वह अपने घर कांगड़ा पहुंचकर 11 दिनों तक होम क्वारेंटाइन में रहा। हिमाचल प्रदेश अब पूरी तरह से लॉकडाउन हो चुका है और राज्य में अबतक कोरोना के संक्रमण से मात्र एक मौत हुई है।

सोम दत्त इस समय अपने गाँव मतलहर में अपने परिवार के साथ हैं। इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए दत्त ने कहा कि यह समय उनके लिए एक साल के क्वारंटाइन जैसा था। कांगड़ा हिमाचल में अब तक एकमात्र COVID-19 प्रभावित जिला है, जिसमें अबतक तीन मामले सामने आए हैं और एक मौत हो चुकी है।

दत्त, एक वैक्सीन रिसर्चर के तौर पर एक चीनी कंपनी के साथ काम करते हैं, जो वैक्सीन पर रिसर्च करती है। वे साढ़े तीन साल पहले वुहान आए थे और गुआंगू स्क्वायर में दो कमरों के अपार्टमेंट में रहते हैं। उन्होने कहा “10 जनवरी को स्थानीय अधिकारियों ने सभी निवासियों को मास्क पहनने के लिए कहा था। ये एक नया वायरस था जिसके बारे में कोई कुछ नहीं जनता था। एक दम से संक्रमित लोगों बढ़ गए और सात दिनों के वसंत उत्सव से पहले बड़ी तादाद में लोग शहर से बाहर जाने लगे। इसके बाद सरकार ने 23 जनवरी को शहर को बंद कर दिया गया।

दत्त ने कहा कि शुरू में लोगों को किराने का सामान और आवश्यक सामान खरीदने की अनुमति दी गई थी। लेकिन 10 फरवरी के बाद उन्हें अपने घरों पर रहने के लिए कहा गया और प्रत्येक समुदाय को उनके दरवाजे तक आइटम पहुंचाने के लिए एक स्वयंसेवक को सौंपा गया था।दिया गया था।

उन्होने बताया कि वह किसी भी इंसान से शारीरिक रूप से नहीं मिल सकते थे वे ‘वी चैट’ और ‘वी नेवर मैट’ ऐप के जरिये दोस्तों से बात कर रहे थे। मैं एक कोने के अपार्टमेंट में रहता था, और मेरी बालकनी एक बगीचे और एक निर्जन क्षेत्र की तरफ खुलती थी। मैं एक भी इंसान नहीं नहीं देख सकता था।

इस दौरान दत्त अपने घर भी वापस नहीं आ सकते थे और परिवार के लोग ने अफवाहों के चलते डरना शुरू कर दिया था। उन्होने बताया कि भारत सरकार ने वुहान से हम में से 112 को लौटने की सुविधा दी। जब मैं 27 फरवरी को अपने कमरे से बाहर निकला और अपने एक सहयोगी से मिला, तो मैं अभिभूत हो गया और उसे गले से लगा लिया। यह एक अलग अनुभव था।

दत्त ने बताया ” दिल्ली में हम लोगों को ITBP कैंप में रखा गया। वहां एक कमरे में चार लोगों को रखा गया था। शुरू में वायरस के खतरे के कारण हम एक दूसरे से डर रहे थे लेकिन, समय के साथ सब ठीक हो गया और हमें वह से अच्छी विदाई दी गई।

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