Economic Relief Package: मजदूरों को प्रति व्यक्ति 7KG अनाज समेत कैश ट्रांसफर पर सरकार कर रही विचार, 52000 करोड़ के अनयूज्ड फंड का भी करेगी इस्तेमाल - Jansatta

मजदूरों को प्रति व्यक्ति 7KG अनाज समेत कैश ट्रांसफर पर सरकार कर रही विचार, 52000 करोड़ के अनयूज्ड फंड का भी करेगी इस्तेमाल

सरकार आर्थिक पैकेज में छोटे-मध्यम उद्योगों के लिए बैंकिंग सेक्टर में छूट और बाजार में पैसे का लेन देन बनाए रखने के लिए लिक्विडिटी इन्फ्यूजन जैसे कदमों का ऐलान कर सकती है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जल्द कर सकते हैं राहत पैकेज का ऐलान।(फोटो-ANI)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ से कोरोनावायरस के मद्देनजर देश भर में लगाए गए लॉकडाउन से आम जनजीवन प्रभावित हुआ है। इसी को देखते हुए केंद्र सरकार जल्द ही गरीब और मध्यम वर्ग की मदद के लिए आर्थिक पैकेज का ऐलान कर सकती है। अधिकारियों के मुताबिक, गैर संगठित क्षेत्र के कर्मचारियों को सरकार डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) स्कीम के जरिए सीधे उनके खातों में मदद पहुंचा सकती है। इसके अलावा छोटे और मध्यम व्यापारियों को बैंकिंग सेक्टर से जुड़े नियमों में छूट देने की घोषणा भी की जा सकती है।

सरकार इसके लिए मजदूर कल्याण कोष में मौजूद राशि के इस्तेमाल की इजाजत दे सकती है। हालांकि, इसके बावजूद उसे राहत पैकेज को पूरा करने के लिए अतिरिक्त फंड्स की जरूरत पड़ सकती है। माना जा रहा है कि इस पैकेज का ऐलान इसी हफ्ते के अंत तक किया जा सकता है। वित्त मंत्रालय के अफसर ने बताया कि आर्थिक पैकेज में लघु-मध्यम उद्योगों के लिए छूट के अलावा, दैनिक वेतनभोगियों के लिए सीधा उनके अकाउंट में कैश ट्रांसफर और पैसे का लेनदेन बढ़ाए रखने के लिए लिक्विडिटी इन्फ्यूजन जैसे कदमों का ऐलान होगा।

केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने हाल ही में ऐलान किया था कि केंद्र सरकार 80 करोड़ लोगों को प्रति व्यक्ति के हिसाब से 7 किलो राशन मुहैया कराएगी। इसमें 27 रु/ किलो वाला गेहूं 2 रुपए प्रति किलो और 37 रुपए किलो की दर वाला चावल 3 रुपए प्रति किलो की दर से मुहैया कराया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा था कि केंद्र सरकार राज्यों को तीन महीने की सप्लाई एडवांस में देगी।

सूत्रों के मुताबिक, केंद्र सरकार इस पैकेज को तैयार करने के लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की मदद ले रही है। इसके तहत दोनों के बीच इस मुद्दे पर भी चर्चा हुई कि नॉन परफॉर्मिंग एसेट (एनपीए) के वर्गीकरण के समय को 90 दिन से 30-60 दिन अतिरिक्त बढ़ा दिया जाए, ताकि कंपनियों को व्यापार में रुकावट के बीच कैश फ्लो की समस्याओं से निपटने के लिए समय मिल जाए और उनके अकाउंट में पड़ा पैसा भी एनपीए न घोषित हो। वित्त मंत्रालय के अधिकारी ने इस बारे में ज्यादा जानकारी देने से इनकार कर दिया, हालांकि एक अन्य अफसर ने बताया कि फंडिंग योजना के समर्थन के लिए आरबीआई केंद्र द्वारा जारी बॉन्ड्स को स्वीकार कर सकता है।

माना जा रहा है कि सरकार के आर्थिक पैकेज में उड्डयन क्षेत्र को राहत मिलेगी। उड्डयन क्षेत्र पर लॉकडाउन का सबसे बुरा प्रभाव पड़ा है। ऐसे में इस क्षेत्र को टैक्स समेत अन्य बकाया चुकाने में राहत मिल सकती है। सरकार उसे चरणबद्ध तरीके से बिना जुर्माना और ब्याज के बकाया चुकाने की सुविधा भी दे सकती है।

बताया गया है कि गैर संगठित क्षेत्रों के रजिस्टर्ड कर्मचारियों के लिए डीबीटी के तहत ही सीधा कैश ट्रांसफर की योजना रखी गई है। इसके अलावा सामाजिक सुरक्षा के दायरे से बाहर के लोगों के लिए भी न्यूनतम अजीविका ट्रांसफर की योजना तय की गई है। निर्माण क्षेत्र (कंस्ट्रक्शन) से जुड़े लोगों के लिए केंद्र सरकार राज्यों को एडवाइजरी जारी कर सकती है, ताकि वे (राज्य) अपने-अपने मजदूर कल्याण संगठन (लेबर वेलफेयर बोर्ड) में जुटाए गए फंड्स को गैरसंगठित क्षेत्र के कर्मियों के लिए आवंटित कर सकें। इससे पहले मंगलवार को केंद्र ने राज्य सरकारों को सलाह दी थी कि वे बिल्डिंग एंड अदर कंस्ट्रक्शन वर्कर्स वेलफेयर सेस एक्ट के तहत 52 हजा करोड़ रुपए के अनयूज्ड सेस के इस्तेमाल के लिए स्कीम बनाएं। ताकि इन फंड्स को निर्माण उद्योग से जुड़े कर्मियों के अकाउंट में सीधे ट्रांसफर किया जा सके।

आर्थिक घाटे में वृद्धि के आसार: सरकार से जुड़े एक आर्थिक सलाहकार ने बताया कि जीडीपी में 1% के प्रोत्साहन में करीब 2 लाख करोड़ रुपए खर्च हो सकते हैं और चूंकि इस साल टैक्स और नॉन टैक्स से जुड़े राजस्व कलेक्शन की उम्मीद ताजा आंकड़ों से भई कम है, ऐसे में आर्थिक घाटे के स्तर में बढ़ोतरी देखी जा सकती है।

0 ) { try { var justnowcookieval = getjustnowcookie( 'jsjustnowclick' ); if ( 1371393 != justnowcookieval || null === justnowcookieval || 'undefined' === justnowcookieval ) { jQuery('.breaking-scroll-j').css('display', 'block'); } else { jQuery('.breaking-scroll-j').css('display', 'none'); } } catch (err) { } } } setTimeout( function() { show_justnow_wid() }, 2000 ); if( getCookie("jsjustnowclick") != '' ){ if( getCookie("jsjustnowclick") != 1371393 ){ document.cookie = 'jsjustnowclick' + "=" + getCookie("jsjustnowclick") + "; expires=Thu, 01 Jan 1970 00:00:00 UTC; path=/;"; } } if( getCookie("jsjustnowclick") == '' ){ jQuery( '#append_breaking_box' ).show(); } else { jQuery( '#append_breaking_box' ).hide(); } // }); }); jQuery(document).scroll(function() { var y = jQuery( this ).scrollTop(); if (y > 400) { jQuery( '#append_breaking_box' ).addClass( 'animate-break' ); } else { jQuery( '#append_breaking_box' ).removeClass( 'animate-break' ); } });
*/ */ */ */